Monday, May 19, 2025

भारत, मेरा स्वप्न

 

भारत, मेरा स्वप्न

भारत मेरा स्वप्न है,
जो हर दिल में बसे।
जहाँ हर मनुष्य को मिले,
सम्मान और सुकून से।

यहाँ की मिट्टी की खुशबू में,
बसा है मेरा संसार।
यहाँ के हर फूल में है,
देश की प्यार की बहार।

हम सब मिलकर बनाएँगे,
सुंदर, समृद्ध भारत।
जहाँ होगा सबका सम्मान,
और होगा सबका अधिकार।

संघर्ष

 

संघर्ष

संघर्ष की राहों में ठोकरें खाईं बहुत,
पर कभी हारा नहीं, न रुकाई बहुत।
आँधियों ने डराया, तूफानों ने छेड़ा,
पर हौंसले को मैंने कभी कम न किया।

हर गिरावट में उठ खड़ा हुआ,
हर आंसू में मुस्कुराया।
जीवन की इस दौड़ में,
मैंने खुद को आजमाया।

ना थकूँगा, ना हारूँगा,
मंज़िल तक पहुँचूँगा।
अपने सपनों को साकार करके,
ज़िंदगी में नाम रचूँगा।

गीत नया गाता हूँ

 

गीत नया गाता हूँ

टूटी हुई पतंग हूँ,
फिर भी आसमां छुना चाहता हूँ।
तूटा हुआ तार हूँ,
फिर भी नया गीत गाना चाहता हूँ।

जीवन की ठोकरों से घबराया नहीं,
हर दर्द को हंसकर सहना चाहता हूँ।
अंधेरों में भी उजियाला खोजता हूँ,
अपने सपनों को साकार करना चाहता हूँ।

ना थकूँगा, ना रुकूँगा,
चलता रहूँगा हर पल, हर रोज़।
दूर तक देखता, मंजिल खोजता,
नई राहों पर चलना चाहता हूँ।

कठिनाइयों से लड़ना सीख लिया,
हार को भी मैंने गले लगाया।
ज़िंदगी की इस खूबसूरत राह में,
एक नया गीत मैं गाता जाता हूँ।

गीत नया गाता हूँ

 

गीत नया गाता हूँ

टूटी हुई पतंग हूँ,
फिर भी आसमां छुना चाहता हूँ।
तूटा हुआ तार हूँ,
फिर भी नया गीत गाना चाहता हूँ।

जीवन की ठोकरों से घबराया नहीं,
हर दर्द को हंसकर सहना चाहता हूँ।
अंधेरों में भी उजियाला खोजता हूँ,
अपने सपनों को साकार करना चाहता हूँ।


एक और कविता का अंश — मौत से ठन गई

मौत से ठन गई है ज़िंदगी मेरी,
अब कोई डर नहीं किसी सफ़र से।
जी चुका हूँ हर पल को पूरी तरह,
अब तो बस चलना है उस सफ़र से।


और एक प्रेरक कविता — क्या खोया क्या पाया

क्या खोया क्या पाया,
यह तो सफ़र का हिसाब है।
हर घड़ी कुछ सिखाता है,
यह ज़िंदगी का किताब है।

साँस की सौगात

 कविता संग्रह "साँस की सौगात" उनके जीवन और विचारों का अद्भुत संकलन है। इसमें उनकी कविताएँ देशभक्ति, जीवन, प्रेम, और संघर्ष के विषयों पर आधारित हैं। उनकी कविताएँ न केवल साहित्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं, बल्कि वे हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझने की प्रेरणा भी देती हैं।

📖 "साँस की सौगात" संग्रह की कुछ प्रमुख कविताएँ:

1. "गीत नया गाता हूँ"

इस कविता में अटल जी ने जीवन के संघर्षों और चुनौतियों के बावजूद आशा और सकारात्मकता की बात की है। वे कहते हैं कि वे टूटे हुए तारों से भी नया गीत गाते हैं, जो जीवन की कठिनाइयों को पार करने की प्रेरणा देता है।

2. "मौत से ठन गई"

यह कविता मृत्यु और जीवन के संबंध में अटल जी की सोच को दर्शाती है। वे मृत्यु को चुनौती देते हुए कहते हैं कि वे जीवन को पूरी तरह से जी चुके हैं और मृत्यु से डरते नहीं हैं।

3. "क्या खोया क्या पाया"

इस कविता में अटल जी ने जीवन के उतार-चढ़ाव, मिलन और बिछड़ने के अनुभवों को साझा किया है। वे कहते हैं कि जीवन एक अनंत कहानी है, जिसमें हमें हर अनुभव से कुछ न कुछ सीखने को मिलता है।

अटल जी की कविताएँ न केवल उनकी साहित्यिक प्रतिभा को दर्शाती हैं, बल्कि वे हमें जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा भी देती हैं। उनकी कविताओं में गहरी सोच, संवेदनशीलता और देशभक्ति की भावना स्पष्ट रूप से झलकती है।


वो कहीं भी गया लौट के तो आया नहीं

 

वो कहीं भी गया लौट के तो आया नहीं

वो कहीं भी गया लौट के तो आया नहीं,
हमारे प्यार का उसका फ़साना था।
वो साथ था तो ज़िंदगी के हर सफ़र में,
अब उसकी यादों का दीवाना था।

वो कहीं भी गया लौट के तो आया नहीं,
हमने उसका इंतज़ार किया हर घड़ी,
उसकी बातें थीं जो दिल को छू जातीं,
वो ख़्वाब था जो हमसे कभी जुदा नहीं।


और एक प्रेरणादायक कविता — "संघर्ष"

संघर्ष की राह में जो ठोकरें खाए,
वो पत्थर भी सोना बन जाए।
हिम्मत न हारो, बढ़ते रहो,
जीत की खबर लाजवाब आए।

मेरा भारत

 

मेरा भारत

मेरा भारत
मेरा स्वाभिमान है,
मेरी संस्कृति है,
मेरी शान है।

यह मिट्टी माँ की है,
यह मेरी जान है,
इस पर मेरी साँसें हैं,
इसमें मेरा जहान है।

यहाँ की हवा में बसती है,
मेरी उम्मीद की किरणें,
यहाँ के लोगों की मुस्कान है,
मेरी खुशियों की पहचान है।