गीत नया गाता हूँ
टूटी हुई पतंग हूँ,
फिर भी आसमां छुना चाहता हूँ।
तूटा हुआ तार हूँ,
फिर भी नया गीत गाना चाहता हूँ।
जीवन की ठोकरों से घबराया नहीं,
हर दर्द को हंसकर सहना चाहता हूँ।
अंधेरों में भी उजियाला खोजता हूँ,
अपने सपनों को साकार करना चाहता हूँ।
ना थकूँगा, ना रुकूँगा,
चलता रहूँगा हर पल, हर रोज़।
दूर तक देखता, मंजिल खोजता,
नई राहों पर चलना चाहता हूँ।
कठिनाइयों से लड़ना सीख लिया,
हार को भी मैंने गले लगाया।
ज़िंदगी की इस खूबसूरत राह में,
एक नया गीत मैं गाता जाता हूँ।
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