सुधार की पहली सीढ़ी
“यदि आप अच्छा बनना चाहते हैं, तो पहले स्वीकार करें कि आपके भीतर कमियाँ हैं।” — एपिक्टेटस
अपनी गलतियों और कमजोरियों को स्वीकार करना पराजय नहीं, बल्कि आत्मसुधार का आरम्भ है। जो स्वयं को पूर्ण और सदैव सही मानता है, वह सीखना बंद कर देता है। इसके विपरीत, जो ईमानदारी से आत्मपरीक्षण करता है, वह निरन्तर बेहतर बनता जाता है।
अपनी भूल स्वीकार करने वाला व्यक्ति छोटा नहीं, बल्कि अधिक समझदार और महान बनता है।
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