Sunday, September 27, 2026

जनसाधारण को विश्वास में लें — भारत के साथ चलें

 

जनसाधारण को विश्वास में लें — भारत के साथ चलें

किसी राष्ट्र की शक्ति केवल उसकी सरकार, प्रशासन या संस्थाओं में नहीं होती। किसी भी राष्ट्र की वास्तविक शक्ति उसके सामान्य नागरिकों में होती है—किसान, श्रमिक, व्यापारी, पेशेवर, युवा, महिलाएँ और देश के प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक में।

इसलिए आज आवश्यकता है कि जनसाधारण को विश्वास में लिया जाए।

उन्हें सच्चाई बताई जाए।
उनके प्रश्नों का उत्तर दिया जाए।
उनकी चिंताओं को सुना जाए।
और भारत के भविष्य की यात्रा में उन्हें साथ लेकर चला जाए।

**जनसाधारण को विश्वास में लें।

उन्हें भारत के साथ चलने के लिए आमंत्रित करें।**

भारत के साथ चलना केवल कोई राजनीतिक नारा नहीं है।

इसका अर्थ है—

संविधान के साथ चलना,
कानून के शासन के साथ चलना,
राष्ट्रीय हित के साथ चलना,
भारत की संप्रभुता और अखंडता के साथ चलना।

साथ ही, देश को किसी भी प्रकार के अवैध विदेशी हस्तक्षेप, गैर-कानूनी बाहरी प्रभाव अथवा अवैध विदेशी वित्तीय सहायता के प्रति सतर्क रहना चाहिए।

यदि किसी व्यक्ति या संगठन के विरुद्ध विश्वसनीय प्रमाण मिलते हैं कि वह भारत की संप्रभुता, सुरक्षा या संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध किसी गैर-कानूनी विदेशी गतिविधि में संलिप्त है, तो उसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए और कानून के अनुसार कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

जहाँ किसी अवैध धन या बाहरी प्रभाव की supply line का प्रमाण मिले, उसे कानून के अनुसार चिन्हित कर बंद किया जाना चाहिए।

लेकिन इसके साथ एक मूलभूत सिद्धांत को कभी नहीं भूलना चाहिए—

**संदेह प्रमाण नहीं है।

आरोप दोषसिद्धि नहीं है।
राजनीतिक असहमति अपराध नहीं है।**

केवल किसी व्यक्ति के विचार, आलोचना अथवा राजनीतिक मतभेद के आधार पर उसे किसी विदेशी शक्ति का एजेंट घोषित करना उचित नहीं हो सकता।

प्रमाण है तो जाँच हो।
अपराध है तो अभियोजन हो।
अपराध सिद्ध हो तो कानून के अनुसार दंड हो।

दंड कानून के माध्यम से हो—राजनीतिक प्रतिशोध के माध्यम से नहीं।

यही एक मजबूत लोकतांत्रिक व्यवस्था की पहचान है।

भारत तब और मजबूत होगा जब आम नागरिकों को यह विश्वास होगा कि कानून सभी के लिए समान है—न कोई कानून से ऊपर है और न किसी निर्दोष व्यक्ति को केवल आरोप के आधार पर अपराधी बनाया जा सकता है।

जनता केवल दर्शक नहीं है।

जनता लोकतंत्र की सबसे महत्वपूर्ण सहभागी है।

जनता देखती है।
जनता सुनती है।
जनता प्रश्न करती है।
जनता तथ्यों को परखती है।
और अंततः जनता अपना संवैधानिक निर्णय देती है।

इसलिए आज आवश्यकता है—

जनता में विश्वास पैदा करने की, भय पैदा करने की नहीं।

जनता को विश्वास में लें।

उन्हें तथ्य दें।

संस्थाओं को मजबूत करें।

राष्ट्रीय संप्रभुता की रक्षा करें।

अवैध विदेशी हस्तक्षेप के विरुद्ध कानून के अनुसार कार्रवाई करें।

और जहाँ अपराध प्रमाणित हो, वहाँ कानून को पूरी दृढ़ता के साथ लागू करें।

क्योंकि—

भारत को कमजोर करके कोई व्यक्ति मजबूत नहीं हो सकता।

कानून के शासन को कमजोर करके कोई समाज सुरक्षित नहीं रह सकता।

और लोकतांत्रिक संस्थाओं को कमजोर करके कोई राष्ट्र लंबे समय तक मजबूत नहीं रह सकता।

आइए, हम सब भारत के साथ चलें—संविधान के सम्मान के साथ, कानून के शासन के साथ और राष्ट्रहित के प्रति अपनी जिम्मेदारी के साथ।

जय हिन्द। 🇮🇳

अशोक कुमार सिंह
अधिवक्ता, हाई कोर्ट कलकत्ता

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